गोरखपुर मझौली राज पर महाराजा शिवशरण का सम्राज्य हुआ करता था.
मझौली राज का इतिहास भरों के नाम
अवध से पाटलिपुत्र तक मझौली राज फैला हुआ था. यह गंडक नदी से घिरा होने के कारण राजधानी बनने के सर्वथा उपयुक्त था. यह बहुत बड़ा राज्य था इसकी चर्चा बुज़ुर्गों से सुने थे।
आज इच्छा हुई मझौली राज का इतिहास समझने की ।गोरखपुर से 107 किलोमीटर दूर सलेमपुर से भाटपार जाने वाली रोड पर नदावर घाट के बाद मझौली राज स्थित है , पहले नदी नाव से पार् करके ही मझौली राज जाना पड़ता था .
आज कल मझौली राज टाउन एरिया है । जो इतिहास में कभी यहां राजभरों और उनके पूर्वजों का राजपाट हुआ करता था। इस राज परिवार द्वारा बसाया गया था। मझौली राज कस्बा यह कस्बा तीन तरफ से नदियों से घिरा है।
मझौली राज पर भर वंश का शासन ज्यादा समय तक था। इस राज्य पर बार बार आक्रमण होते रहते थे जो सबल पडता यहां का शासक बन जाता था ।
परन्तु राजभर शासकों का शासन मझौली राज पर सबसे ज्यादा समय तक रहा है। कभी भर शासक यहां के सरदार थे, और इनकी वीरता की धार भारत में नहीं विदेशों में गुजरती थी,
सर्वप्रथम इस क्षेत्र से कुषाण, हुड शासकों को खदेडकर दूसरी सदी में नागभारशिव भरो ने यहां शासन किया । तदोपरान्त चौथी सदी में ऐसा लगता है कि समुद्रगुप्त ने अपने दिग्विजय के समय भारशिवों को परास्त करके यहां अपनी सत्ता कायम की थी । परन्तु राजभर हार नहीं मानते थे। मौका पाकर पुनह राजभरों ने मझौली पर कब्जा कर लिया करते थे। 8 वीं सदी में राजभर शासक शिवविलास भर को हराकर राजा विश्वसेन ने अपनी सत्ता कायम की ।
इधर राजभरों को अपना राज्य चले जाने का मलाल कम नहीं हुआ । कई दशक बाद फिर राजभरों ने संगठित होकर यहां के राजा को परास्त करके। इस राज्य पर पुनह कब्जा कर लिया करते थे । तबसे यहां राजभरों का शासन चलता आ रहा था । 12वी सदी के प्रारम्भ में यहां पर राजभर शासक शिवशरन भर यहां के राजा हुए । उन्होंने अपनी सैन्य शक्ति के बल पर अपने राज्य का विस्तार किया । और उनके आदेश अनुसार सारे कार्य कुशल पूर्वक हो रहे थे, कि अवध प्रान्त में 12 वीं सदी में जब जगह जगह मुस्लिम शासकों का शासन हुआ। तो मुस्लिम शासकों ने सत्ता संघर्ष में राजभरों के कत्लेआम की घोषणा की। और धोखे से मारने के आदेश दिया । छल पूर्वक भरो को नामोनिशान मिटा दो, उस समय कुछ राजभर जान बचाने के लिए जंगलों का शरण लिए तो कुछ ने देश छोडकर अन्य देशों को पलायन कर लिया ।
राजभरों की शक्ति कमजोर पडती गई । उसी समय विशेन वंश के 40 वीं पीढी के राजा चक्रसेन उर्फ चक्रनारायण ने राजभर शासक शिवशरन के राज्य पर अचानक आक्रमण कर दिया, और राजा शिवशरन को परास्त करके मझौली में अपना शासन कायम किया । इतिहासकार देवीसिंह माण्डवा ने राजा चक्रनारायण का भरगढा, पर सत्ता वापस करने की घटना को इस प्रकार उल्लेख किया है , कि ’विशेन वंशीय राजा चक्रनारायण ने भरों पर भारी विजय कर मध्यावली को अपना केन्द्र बनाया । इसी क्षेत्र का नाम आगे चलकर मझौली पडा । फिर यह राज्य उत्तरोत्तर बढकर नेपाल तक हो गया था।
लेखक श्री देवीसिंह माण्डवा इतिहासकार लिखते हैं कि उपरोक्त विचारों से लगता है कि विशेन वंश की वंशावली और मझौली के शासकों को पराजित करके विशेन राजाओं का सत्तासीन होना । परन्तु पुस्तक में विजेता विशेन राजा के नाम पर उल्लेख करना तथा पराजित राजा के नाम का उल्लेख न करना ,इन उल्लिखित घटनाओं के कपोल कल्पित होने की तरु इशारा करती है । ऐसा लगता है कि पुस्तक विशेन वाटिका में सत्यांश पर ज्यादा ध्यान न देकर विशेन वंश के महिमा मण्डन पर ज्यादा ध्यान दिया गया है वही जो भर यहां के वीर प्रबल शासक थे। उसका उलेख नहीं दिया। और जमकर विशेनों की तारीफ की है जहां तारीफ के योग्य भर है इनको उस लायक नहीं समझा गया। यही वजह है कि इस पुस्तक में लिखी गई घटनाओं में पारदर्शिता नहीं है ।
राजा चक्रनारायण के वंशजों का मझौली पर शासन चल ही रहा था कि मौका पाकर राजभरों ने पुनह फिर एक बार मझौली राज पर कब्जा कर लिया । इतिहासकार श्री एम बी, राजभर की पुस्तक नागभारशिव का इतिहास पृष्ठ 162 के अनुसार 16 वीं सदी तक सलेमपुर तथा मझौली राज में राजभरों का शासन था । अंग्रेजों के शासनकाल में अंग्रेजों के कृपापात्र विशेन वंश का मझौली में कब्जा हो गया जो आजतक चल रहा है । लेखक शमीम इकबाल के अनुसार –इतिहास में अपनी भूमिका के प्रति पर्याप्त स्थान नहीं पाने वाले इस राज (मझौली राज) का स्थापना काल 12 वीं सदी से 17 वीं सदी तक का समय इसके उत्कर्ष का समय माना जाता है । समवारपत्र-सहारा पृष्ठ 12 ,शीर्षक मझौली राज, सम्वाददाता शमीम इकबाल) लिखते हैं कि उल्लेख से स्पष्ट है कि मझौली में विशेनवंश का शासन 12 वीं सदी (1140 ईस्वी) के पहले तथा 17 वीं सदी के मध्य स्थायी नहीं रहा है । इस अवधि में राजभर शासकों का यहां शासन रहा है ।
निवेदन है की राजपरिवार या सम्बंधित व्यक्ति अगर इस विषय में कुछ जानकारी साझा कर सकें तो बड़ी कृपा होगी। अपूर्ण ज्ञान को पूरा किया जायेगा.......