एक प्रसिद्ध अंग्रेज इतिहासकार क्या लिखें हैं भर भारशिव जाति के बारे में

 


राजभर भारशिव भर समाज में अनेकों राजा महाराजा एवं महारानीयो ने वीर प्रतापी के रूप में जन्म लिये,और सभी लोग अपने साहस और हिम्मत के दम पर भारतवर्ष की रक्षा की, वर्षों तक लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुये, इस आधार पर राजभर समाज का इतिहास बड़ा ही गौरवमई है ...

इसमें कोई संदेह नहीं है लेकिन कुछ इतिहास चोरों एवं चाटुकारों की वजह से राजभर समाज की इतिहास एवं पूर्वजों के नाम एवं उनकी वीरता को दबाया गया, लेकिन अब राजभर समाज जाग चुका है अपने इतिहास एवं अपने पूर्वजों के वीरता एवं साहस को अच्छी तरह से जान चुके हैं ,और परख चुके हैं जिसका परिणाम धीरे- धीरे सामने आ रहा है | 

दोस्तों उस समय भारशिव रजवाड़ा परिवार की सबसे बड़ी ताकत तीर और तलवार था, जिसके दम पर किसी भी दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए युद्ध के मैदान में लड़ाई को जीत लेते थे , भारशिव भरो का अदम्य साहस और वीर पुरुषों को भूल पाना भारत के लिए कल्पित है, भारशिव भारत देश के सबसे सर्वश्रेष्ठ क्षत्रियों में इनकी गिनती होनी चाहिए, 


भर है तो भारत है यह कहावत नहीं बल्कि सत्य है इतिहास पढ़ो आपको पता चल जाएगा, बहुत से लोग बस जाति का मजाक उड़ाते हैं लेकिन उन्हें पता नहीं कि अगर भर नहीं होते तो आज मस्जिदों में नमाज पढ़ रहे होते , अपने बाहुबल वीरता युद्ध से भारशिव भर भरत लोग ऐसा दहशत फैलाया कि विदेशी लुटेरों को 200 वर्षों तक हिम्मत नहीं हुई, भारतवर्ष में आंख उठाकर देखने की, आपको भरो का इतिहास साहित्य किताबों ,भारत सरकार के दस्तावेजो और तमाम मुस्लिम किताबों में भी उल्लेख मिलता है , बहुत सारे इतिहासकारों का मानना है, कि इस वीर जाति ने भारत देश के लिए अपना सब कुछ निछावर कर दिया, 


एक अंग्रेज इतिहासकार मिस्टर गोस्त्ब आपर्ट P, H,D क्या कहते हैं भरो के बारे में....

एक भर राजा थे जिसके चार पत्नीया थी, जिनके एक स्वजातिए थी और तिन अन्य जाति की थी, अंत मे जिन वंशो के पास आजकल भूमि है और अपने को प्राचीन राजपूत कहते है, चाहे वो सम्मान के भय और समाज कि लज्जा से बात को स्वीकार न करे, परन्तु वास्तव मे भरो के वंसज है, क्योकि किसी समय इस देश के प्रतेक एकड़ भूमि पर भरो का आदिपत्य और बोलबाला था, (दी ओरिजनल तैवितिंस ऑफ़ भारत्वार्स पृष्ट ४४,४५,४६) पर लिखा है आप अध्ययन कर सकते हैं

लेकिन अब वह समय नहीं है, इस समय लोकतंत्र देश है इस लोकतंत्र में अगर राजभर समाज को तीर और तलवार की तरह ताकत  पुनः प्राप्त करना है तो आज के समय में शिक्षा जैसे घातक हथियार का अधिक से अधिक प्रयोग करना होगा क्योंकि आज के दौर में शिक्षा ही ऐसी हथियार है 


जो इस लोकतंत्र में हर किसी तरह की लड़ाई को जीता जा सकता है इसलिए समस्त राजभर समाज से सादर अनुरोध निवेदन है आप लोग अपने बच्चों को अधिक से अधिक शिक्षित बनाएं और अपने पूर्वजों के साहस वीरता तथा इतिहास के बारे में भी अवगत कराएं जिससे राजभर समाज के बच्चों में उस समय पूर्वजों की तरह जोश, और जुनून, साहस ,हिम्मत बना रहे और हर लड़ाई को जीत सकें धन्यवाद
                     

लोकप्रिय पोस्ट