राजा छीता भर का इतिहास.......

 सीतापुर के निर्माता महाराजा छीता भर



उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित सीतापुर गजेटियर वाल्यूम ग्स् के पेज 214 पर अंकित है कि सीतापुर जिले का प्राचीन नाम छितियापुर था।

 छितियापुर नाम महाराजा छीता राजभर के नाम पर पड़ा है जिन्होंने छितियापुर को बसाया थे। महाराजा छीता भर के किले का भग्नावशेष आज के सीतापुर जिले के पूर्वी छेार पर सीतापुर, लखनऊ राजमार्ग पर प्लाई उड फैक्ट्री के पास आज भी उनकी शौर्य गाथा का जीता-जागता प्रमाण है।


छितियापुर‘ नाम का यह अचंल महाराजा छीता भर के समय से मुगलों के शासन काल तक लगातार चलता रहा। अंग्रेजी शासन काल में सीतापुर का नामकरण हुआ। सीतापुर को मुख्यालय बनाने से पूर्व अंग्रेज अपनी शासन व्यवस्था मल्लापुर से चलाते थे,

 किन्तु मल्लापुर में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से तंग आकर उन्होंने कालान्तर में सीतापुर को ही अपनी प्रशासनिक व्यवस्था का केन्द्र बना लिया। तभी से छितियापुर का नाम बदल कर सीतापुर हो गया।



महाराजा छीता राजभर के कुशल शासन प्रणाली और उनके राज्य की खुशहाली को देख कर कन्नौज का राजा जयचन्द जल उठा। उसने महाराजा छीता भर को अपनी अधीनता स्वीकार करने का संदेश भेजा। लेकिन महाराजा छीता भर ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया।

 इससे कुपित होकर जयचन्द ने महोबा के सामन्त आल्हा एवं ऊदल से एक संधि कर ली कि किसी भी तरह छल-बल से राजा छीता भर के राज्य पर कब्जा कर लिया जाये। आल्हा एवं ऊदल ने अचानक धोखे से राजा छीता भर के राज्य पर हमला कर दिया।

 इस छल-बल की लड़ाई में राजा छीता भर वीरगति को प्राप्त हो गये। कालान्तर में यह इलाका मुसलमान शासकों के हाथ होते हुए अंग्रेजों के कब्जे में आ गया। अंग्रेजों ने मल्लापुर को अपनी प्रशासनिक व्यवस्था का केन्द्र बनाया लेकिन बाद में उसे बदल कर सीतापुर ले आये। यही सीतापुर, छितियापुर का परिवर्तित नाम है।

महाराजा छीता राजभर का किला उचित रख-रखाव और देख-भाल के अभाव में मिट्टी के टीले के रुप में लखनऊ से सीतापुर जाने वाले राजमार्ग पर नगर के प्रवेश के पहले प्लाई उड फैक्ट्री के पास स्थित है। इसके एक भाग को काट कर रेलवे लाइन का विस्तार किया गया है। दक्षिण की ओर राजमार्ग का रास्ता निकाल दिया गया है।

 थोड़ा हिस्सा जो बचा है उस पर सुचौना देवी का एक छोटा सा मंदिर स्थित है, जो महाराजा छीता राजभर की अराध्य देवी थीं। इस स्थल के पूर्वी भाग पर जो सरकारी अभिलेखों में बंजर अंकित है, एक व्यापारी ने पेट्रोल पंप लगा लिया है। किले के भग्नावशेष पर महाराजा छीता भर की मूर्ति लगवाने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है


  लेकिन किले के पूर्वी छोर पर स्थित पेट्रोल पंप के मालिक ने उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया है। अभिलेखों में यह स्थल बंजर अंकित है, लेकिन पेट्रोल पंप का मालिक कहता है कि उसने अंग्रेजी शासनकाल में यह जमींन खरीदी थी। चूंकि यह स्थान भरो के सम्मान और शौर्य का प्रतीक है, इस कारण सरकार की ओर से इस स्थगन आदेश को निरस्त कराने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

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