भर भारशिव राजाओं ने जिस राज्य में राज करते थे वह आपने नाम से विख्यात करते थे
राजा काकोरन राजभर का इतिहास सर्वोपरि है....
लखनऊ के पश्चिम में हरदोई रोड पर काकोरी नाम का एक कस्बा है। यह आम की बागवानी और क्रांतिकारी कांड के लिए तो मशहूर है ही, इसका इतिहास भी कम रोचक नहीं है। The jr
11वीं शताब्दी के अंतिम दिनों में काकोरी पर कसमंडी (कंसमडप) मलिहाबाद के निकट के राजा कंस भर का अधिकार था, जो जाति का राजभर थे। उस समय यहां भरों की बस्ती थी।जब सैय्यद सालार मसूद गाजी दिल्ली से यहां आया, तब उनसे इस राजा ने युद्ध किया। इस लड़ाई में कंस भर काकोरी हार बैठे और यह कस्बा मुलसलमानों के हाथ आ गया।
- हालांकि जब मुसलमानों का प्रभुत्व कम हुआ
भरों का साम्राज्य चले जाने के बाद फिर दोबारा भरो ने अपने साम्राज्य को छीन लिया
और एक बार फिर भरों ने रहना शुरू कर दिया। 13वीं सदी तक यहां भरों का ही साम्राज्य रहा।
भरों के बढ़ते हुए जोर को दबाने के लिए सुल्तान शम्सुद्दीन अल्तमश ने मलिक नासिरुद्दीन को यहां सेना भेजा जो भरों को युद्ध में धोखे से पराजित कर यहां दिल्ली की हुकूमत कायम कर गया।
13वीं सदी में भरों के राजा काकोर ने काकोरी का किला बनवाया और इसके चारों ओर लोग रहने लगे।
सुल्तान हुसैन शर्की ने काकोरी को फिर से इस्लामी जामा पहनाना शुरू किया।
उसकी हुकूमत में सन् 1478 तक ये बस्ती जौनपुर की जागीर बनी रही,
सिकंदर लोदी के जमाने में काकोरी दिल्ली के हाथों में पहुंच गया ,
जनपद राय बरेली के दक्षिण पूर्व जगतपुर से लगभग 12 किलो मीटर दक्षिण - पश्चिम तहसील डलमऊ के अन्तर्गत सुदामनपुर में राजा काकोरन राजभर का किला स्थित है, राजा काकोरन राजभर डलदेव भर के चार भाई थे,
साम्राज्य को मजबूती देने के लिए गंगा के उत्तरी किनारे पर डलमऊ पूरब की ओर राजा ककोरन राजभर को उस भूभाग के सुरक्षा हेतु किला बनाकर तैनात किया गया था,
इस किले के प्रांगण में भी शिव मंदिर का निर्माण करवाया गया था,
किले का आकार छोटा था पर पूरब की सीमा की रक्षा के लिए यहाँ फौज के रखने का अच्छा इन्तजाम था, एक भर 100 मुगलों पर भारी थे,
काकोरन के किले के पास ही इसी क्षेत्र के सुदामनपुर रणभूमि में भर महाराजा डलदेव , शर्की युद्ध में वीर गति को प्राप्त हुए थे, इब्राहिम साह शर्की ने धोखे से भरो को प्राप्त किया था, भरो से सामने से लड़ने की हिम्मत नहीं होती थी किसी की.
भरो का साम्राज्य धोखे से छीना गया, होली के दिन. भर बहुत लड़ाकू और वीर योद्धा हुआ करते थे जो ठान लेते थे वह पूरा भी करते थे, चाहे उसके लिए कुछ भी हो जाए, बहुत गर्म मिजाज के होते थे,भर राजा किसी को धोखे से वार नहीं करना चाहते थे .
भरों ने हमेशा सामने से लड़ाई लेना पसंद किया . और भरो के विरोधी हमेशा छल कपट से लड़ाई लेते थे विरोधी.और हार का मुख्य कारण यही था इस जिले में एक ककोरगढ़ स्थान है
कहा जाता है कि इसका नामकरण राजा ककोरन राजभर से ही हुआ,
ककोरी की घटना अग्रेजों के शासन काल की प्रसिद्ध घटना है. यह ककोरी स्थान प्राचीन इतिहास .भरों के अतीत को ताजा कर देती है,
लखनऊ के ककोर अन्य भर राजा थे यही सत्य है . राजभर राजाओं की निशानी आज भी मौजूद, राजभरों को अपने पूर्वजों की कुर्बानियों को याद करना चाहिए,