शेरगढ़ का किला कभी भरो का किला हुआ करता था जिसका नाम भरकुंडा़ था
दुनिया में ऐसे कई किले हैं, जो अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए हैं। ऐसा ही एक किला बिहार के भभुआ जिले के कैमूर पहाड़ी पर स्थित है, जिसे 'शेरगढ़ का किला' कहा जाता हैं। यूं कहे तो इसका पुराना नाम क्या है आप लोग सच्चाई से परे है यह किला पहले भर राजाओं का किला हुआ करता था।
रोहतास के इतिहासकार डॉ.श्याम सुन्दर तिवारी जी का कहना है कि वर्तमान शेरगढ़ का नाम पहले भर, कूंढा़ का किला कहा जाता था। छवी सातवीं ईसा पूर्व की बात है जब भरो का अधिपत्य था। उसका उल्लेख मध्यकालीन इतिहास की पुस्तकों तारी़ख-ए-शेरशाही और बिहार सरकार के दस्तावेज में तथा, 'तबकात-ए-अक़बरी' में मिलता हैं
लगभग 800 फीट ऊंची कैमूर पर श्रृंखला की एक पहाड़ी पर स्थित है शेरगढ़ का किला
जब फ्रांसिस बुकानन 13 जनवरी 1813 को यहां आया था तो इस किले के ¨सहद्वार के ऊपर आठ बुर्जियां थीं, जिनमें से आज मात्र पांच बुर्जियां बची हैं। ¨सहद्वार से दक्षिण की ओर रास्ता मुख्य भवन की ओर जाता है। उबड़-खाबड़ रास्ता अब जंगल व कंटिली झाड़ियों से भरा पड़ा हैं। ¨सहद्वार से लगभग किलोमीटर दूर दक्षिण में दूसरी पहाड़ी है,
जिसके रास्ते में ही एक तालाब बना हुआ है। यह रानी पोखरा के नाम से जाना जाता है। दूसरी पहाड़ी भी प्राचीर से घिरी है। इसके अंदर मुख्य महल है। दरवाजो तक जाने के लिए सीढि़यां बनी हैं। दरवाजा अब गिरने की स्थिति में है। महल के भीतर दरवाजो के दोनों ओर दो खुले दालान हैं। कुछ दूर जाने पर भूमिगत गोलाकार कुआं है। भूमिगत कुएं से पूरब में चार मेहराब बनाते खंभों पर टिका चौकोर तह़खाना है। इस तह़खाने से पश्चिम-उत्तर में एक विशाल महल के ध्वंसावशेष बिखरे हैं।
फ्रांसिस बुकानन के अनुसार कहते हैं कि यहां भारी नरसंहार हुआ था। इसी कारण यह किला अभिशप्त और परित्यक्त हो गया।
कैमूर की पहाड़ियों पर मौजूद इस किले की बनावट दूसरे किलों से बिल्कुल अलग है। यह किला इस तरह से बनाया गया है कि बाहर से यह किला किसी को भी नहीं दिखता। किला तीन तरफ से जंगलों से घिरा हुआ है, जबकि इसके एक तरफ दुर्गावती नदी है। इस किले में सैकड़ों सुरंगें और तहखाने हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि ये सुरंगें कहां खुलती हैं, इसके बारे में आज तक किसी को भी पता नहीं चला। किले के अंदर जाने के लिए एक सुरंग से होकर जाना पड़ता है जो की आपको कुछ समय के लिए इतिहास में होने का अनुभव कराता है| कहते हैं कि अगर इन सुरंगों को बंद कर दिया जाये, तो किला किसी को दिखाई भी नहीं देगा। इस किले को सबसे पहले भरो ने अपने दुश्मनों से बचने के लिए बनवाया था। इस किले को इस तरह बनवाया गया था कि हर दिशा में अगर दुश्मन कोसों दूर भी रहे तो उसे आते हुए साफ-साफ देखा जा सकता है। कहते हैं कि यहाँ बने इन सुरंगों का राज सिर्फ और उनके भरोसेमंद सैनिकों को ही पता था। चंद गद्दारों को इस सारी खुफियों सुरंगों का रास्ता मालूम था इसलिए भरो के दुश्मनों के साथ मिलकर भरो को प्रास्त किया,और भरखंड पर राज किये। जो वर्तमान में शेरगढ़ का किला है
इस किले से एक सुरंग रोहतास गढ़ किले तक जाती है, लेकिन बाकी सुरंगें कहां जाती हैं, ये किसी को नहीं पता। यह किला अतीत के पन्नो में सर्वश्रेष्ठ हुआ करता था| प्राचीन इमारतों से प्रेम रखने वालों को यहाँ एक बार जरूर आना चाहिए|


