भर वीरों की वीर गाथा को एक छोटी सी किताब में समेत पाना बड़ा ही मुश्किल है

 

यदि भारत के इतिहास को खंगाला जाये तो मालूम पडेगा की जो समुदाय या जातीया विदेशी लुटेरे मुगलों से जमकर लोहा लेने में कामयाब रही,

 उनको रोकने में ‌बाहूबल वीरता दिखाई , उन समुदाय और जातियों को मुग़ल राज आने बाद अछूत बनाकर यातना और मौत देने के साथ साथ उनके साथ सामाजिक और आर्थिक यातना भी दी गयी। और इस काम के लिए मुगलों ने लालची व कायर धोखेबाज डरपोक हिन्दुओ को ही चुना। मुगलों के चंद टुकड़ों पर पलने वाले मुगलों के साथ मिलकर धोखे से भर क्षत्रिय को हराया, नहीं तो मुगलों में कहां इतनी पावर थी। भर वीरो को हराने की। एक राजभर क्षत्रिय सौ मुगलों पर भारी थे,

इसके सबसे बड़े उदाहरण उत्तर प्रदेश की राजभर जाति है जिनके पास बहुत सारे राज्य थे। लेकिन महाराजा सुहेलदेव राजभर के लडाकू द्वारा पुरे भारत को तहसनहस करने वाली सलार गाजी की लुटेरी सेना को जो दस गुना बड़ी थी।

 आधे दिन की लड़ाई में काटकर ख़तम कर दिया, और जब फिर दुबारा से मुग़ल ताकतवर होकर भारत आये तो राजभरो की रियासतों को यही के कुछ लालची लोगो को मिलाकर धोखे से भरो को युद्ध कर ख़तम कर दिया। और राजभर जातिया तितर वितर होकर पुरे क्षेत्र में फ़ैल गयी। वे जहा भी गए उनका अछूत बनाकर शोषण किया गया, हिन्दू बिरोधी आपको यह बात नहीं जानने देगी. 

           यूपी में क्षत्रिय महाराजा सुहेलदेव राजभर द्वारा बहराइच में हिन्दू संहारक महमूद गजनी के भांजे “सालार गाजी” का सेना सहित वध कर दिया गया,

 क्योकि कनक भवन मंदिर-अयोध्या को नष्ट करने के बाद सलार गाजी ने बहराइच का रुख किया। और सुहेलदेव राजभर के दमदार लड़ाकूओं ने अपने से दस गुना बड़ी मुग़ल लुटेरो को काट डाला।

 और नेहरू चाचा के इतिहासकारों ने इस राजभर राजा का कही नाम तक नहीं उद्धृत किया है। और सलार गाजी जैसे पापी को हिन्दू के लिए पूजनीय प्रचारित करा दिया गया। जिसने अयोध्या के कनक भवन मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। जिसका विवरण आज भी अयोध्या के कनक भवन मंदिर में लगी शिला लेख में दर्ज है. कितने हिन्दुओ को यह लेख दिखा है पर इस पर कोई सुनवाई नहीं किया...... 

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