भर शूरवीरों की एक छोटी सी दास्तां

 राजभर अत्यंत पराक्रमी और शक्तिशाली योद्धा होते थे। भर वीरो के बारे में कहा जाता है कि ये काफी पराक्रमी और कुशल योद्धा होते थे।

 ये देश के लिए मर मिटने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। इतिहासकारों के मुताबिक भर भारशिव क्षत्रिय रणक्षेत्र में वीरगति प्राप्त करना अपना सौभाग्य समझते थे।


यदि भारत के इतिहास को खंगाला जाये तो मालूम पड़ेगा की जो समुदाय या जातीया विदेशी लुटेरे मुगलों से जमकर लोहा लेने में कामयाब रही, उनको रोकने में ‌बाहूबल वीरता दिखाई , उन समुदाय और जातियों को मुग़ल राज आने के बाद अछूत बनाकर यातना और मौत देने के साथ साथ उनके साथ सामाजिक और आर्थिक यातना भी दी गयी। 


और इस काम के लिए मुगलों ने लालची व कायर धोखेबाज डरपोक हिन्दुओ को ही चुना। मुगलों के चंद टुकड़ों पर पलने वाले मुगलों के साथ मिलकर धोखे से भर क्षत्रिय को हराया, 


नहीं तो मुगलों में कहां इतनी पावर थी। भर वीरो को हराने की। एक राजभर क्षत्रिय सौ मुगलों पर भारी थे,

भारत को सोने की चिड़िया बनाने का श्रेय भर क्षत्रिय जाति को जाता है। भर भरत जाति के बहुत बड़े पैमाने पर विदेशों तक व्यापार चलते थे। उसके बदले में सोने के सिक्के मिलते थे। 

और यही वजह था कि भारत सोने की चिड़िया बना,लेकिन वामपंथी इतिहासकारों ने भरो का  इतिहास के पन्नों से सफाया कर दिया,इतिहासकारों ने उन चोरों को महान बताया जो विदेशी हमलावरों का साथ दिया, 


जिन लोगों को इतिहासकारों ने महान बताया है अगर वह लोग वाकई में महान थे तो अंग्रेजो ने इनको क्रिमिनल एक्ट में क्यों नहीं डाला , मुगलों ने जाति समूह में सिर्फ भर मारो आंदोलन ही क्यों चलाया, आखिरकार और भी तो जातियां थी,


इसके सबसे बड़े उदाहरण उत्तर प्रदेश की राजभर जाति है जिनके पास बहुत सारे राज्य थे। लेकिन महाराजा सुहेलदेव राजभर के लडाकू द्वारा पुरे भारत को तहसनहस करने वाली सलार गाजी की लुटेरी सेना को जो दस गुना बड़ी थी। 

आधे दिन की लड़ाई में काटकर ख़तम कर दिया, और जब फिर दुबारा से मुग़ल ताकतवर होकर भारत आये तो राजभरो की रियासतों को यही के कुछ लालची लोगो को मिलाकर धोखे से भरो को युद्ध कर ख़तम कर दिया। 

और राजभर जातिया तितर वितर होकर पुरे क्षेत्र में फ़ैल गयी। वे जहा भी गए उनका अछूत बनाकर शोषण किया गया, हिन्दू बिरोधी आपको यह बात नहीं जानने देगी. 

           यूपी में क्षत्रिय महाराजा सुहेलदेव राजभर द्वारा बहराइच में हिन्दू संहारक महमूद गजनी के भांजे “सालार गाजी” का सेना सहित वध कर दिया गया, क्योकि कनक भवन मंदिर-अयोध्या को नष्ट करने के बाद सलार गाजी ने बहराइच का रुख किया। और सुहेलदेव राजभर के दमदार लड़ाकूओं ने अपने से दस गुना बड़ी मुग़ल लुटेरो को काट डाला। और नेहरू चाचा के इतिहासकारों ने इस राजभर राजा का कही नाम तक नहीं उजागर किया। और सलार गाजी जैसे पापी को हिन्दू के लिए पूजनीय प्रचारित करा दिया गया। जिसने अयोध्या के कनक भवन मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। जिसका विवरण आज भी अयोध्या के कनक भवन मंदिर में लगी शिला लेख में दर्ज है. कितने हिन्दुओ को यह लेख दिखा है पर इस पर कोई सुनवाई नहीं किया

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